है तेरा ही वो वात्सल्य,
तेरा ही स्वार्थरहित वो स्नेह,
तेरी ममता तेरा ही प्रेम,
जो अक्षत आज भी मेरी देह।
जब भी रोया तेरे हाथों ने
मेरे चक्षु से आंसू पोछे,
जब प्रयत्न किया कभी चलने का,
पथ के सारे कांटे नोचे।
तेरी छवि मेरे नयनों में,
मेरे सर पे तेरा हाथ रहे,
न कभी अकेला पड़ जाऊं,
जीवन भर तेरा साथ रहे।
पर विडम्बना ही जीवन की,
तू एक दिन छोड़ के जाएगी,
बस पूछूँ अगले जन्म में भी
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