Monday, December 22, 2014

शिक्षक

कभी मुझसे था संसार चला
कभी मुझसे था साम्राज्य फला
मैं शिक्षक कहलाता था
घर घर में पूजा जाता था
सब छात्र शीष नवाते थे
पलकों पर मुझे बिठाते थे
राष्ट्र ने फिर बदला चोला
राजनीति शिक्षा में घोला
शिक्षक से हो गया मास्टर
छात्रों से लगने लगा डर
बना सरकार का याचक विशेष
अब शिक्षक का भग्नावशेष।

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